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एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी ने नौसेना के 26वें प्रमुख : समुद्र से जंग जीतने के लिए तैयार रहना होगा’ हर सवाल का दिया जवाब


 

नई दिल्ली

 

एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी ने नौसेना के 26वें प्रमुख के रूप में कार्यभार संभालने के बाद मंगलवार को कहा कि नौसेना को समुद्र में संभावित शत्रुओं से निपटने के लिए हर समय तैयार रहना होगा। संचार और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध विशेषज्ञ एडमिरल त्रिपाठी ने आर हरि कुमार के सेवानिवृत्ति के बाद यह जिम्मेदारी संभाली है।

सैनिक स्कूल रीवा के पूर्व छात्र, एडमिरल त्रिपाठी नौसेना स्टाफ के उप प्रमुख के रूप में कार्यरत थे। एडमिरल त्रिपाठी ने ऐसे समय में नौसेना प्रमुख की जिम्मेदारी संभाली है जब लाल सागर और अदन की खाड़ी समेत अनेक रणनीतिक जलमार्गों पर सुरक्षा चुनौतियां पैदा हुई हैं, जिनमें क्षेत्र में हाउती उग्रवादियों द्वारा विभिन्न कारोबारी जहाजों को निशाना बनाया जाना शामिल है।

समुद्र में युद्ध जीतने के लिए तैयार रहना होगा

एडमिरल त्रिपाठी ने संवाददाताओं से कहा पिछले कुछ सालों में हमारी नौसेना युद्ध के लिए तैयार, एकजुट, विश्वसनीय और भविष्य के लिहाज से तत्पर बल के रूप में विकसित हुई है। उन्होंने कहा समुद्री क्षेत्र में मौजूदा और उभरती चुनौतियों के मद्देनजर भारतीय नौसेना को संभावित शत्रुओं से निपटने के लिए हर समय परिचालन दृष्टि से तैयार रहना होगा और यदि कहा जाए तो समुद्र में तथा समुद्र से युद्ध जीतने के लिए तैयार रहना होगा। नए नौसेना प्रमुख एडमिरल त्रिपाठी ने कहा मेरा एकमात्र ध्यान और प्रयास इस दिशा में होगा।

आत्म-निर्भरता बढ़ाने के प्रयासों को प्राथमिकता

नौसेना प्रमुख ने यह भी कहा कि आत्म-निर्भरता बढ़ाने के लिए नौसेना के जारी प्रयासों को बढ़ाने पर वह प्राथमिकता देंगे। उन्होंने कहा मैं आत्म-निर्भरता की दिशा में, नई प्रौद्योगिकियों को पेश करने में और विकसित भारत के लिए हमारे सामूहिक प्रयासों की दिशा में राष्ट्रीय विकास का महत्वपूर्ण स्तंभ बनने में भारतीय नौसेना के चल रहे प्रयासों को भी मजबूत करूंगा।

मानव संसाधन से संबंधित मुद्दों पर भी देंगे ध्यान

एडमिरल त्रिपाठी ने कहा कि वह बल के मानव संसाधन से संबंधित मुद्दों पर भी ध्यान देंगे। उन्होंने नौसेना प्रमुख के रूप में कार्यभार संभालने से पहले राष्ट्रीय समर स्मारक पर देश के शहीद नायकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्हें रायसीना हिल्स के साउथ ब्लाक परिसर में गार्ड आफ आनर दिया गया। एडमिरल त्रिपाठी ने नौसेना प्रमुख के रूप में प्रभार संभालने से पहले अपनी मां रजनी त्रिपाठी का आशीर्वाद लिया।

सन 1964 में हुआ था जन्म

एडमिरल त्रिपाठी का 15 मई 1964 को जन्म हुआ था। दिनेश कुमार त्रिपाठी सैनिक स्कूल रीवा के छात्र रहे हैं। 1 जुलाई, 1985 को वह भारतीय नौसेना में शामिल हुए थे। संचार और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध विशेषज्ञ वाइस एडमिरल त्रिपाठी का करीब 39 वर्ष का लंबा करियर रहा है।

आईएनएस विनाश की संभाल चुके हैं कमान

नौसेना के उप प्रमुख का पद संभालने से पहले वह पश्चिमी नौसैन्य कमान के फ्लैट ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ रह चुके हैं। उन्होंने आईएनएस विनाश की भी कमान संभाली थी। इसके अलावा, रियर एडमिरल के तौर पर वह ईस्टर्न फ्लीट के फ्लैट आफिसर कमांडिंग रह चुके हैं। वहीं, वह भारतीय नौसेना अकादमी एझिमाला के कमांडेंट भी रह चुके हैं।


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